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गर मुसीबत थी तो ग़ुर्बत में उठा लेता 'असद'
मेरी दिल्ली ही में होनी थी ये ख़्वारी हाए हाए

Had it been mere sorrow, Asad, I'd have borne it in distant lands;But this utter humiliation, alas, was meant for my Delhi's sands.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर यह सिर्फ़ एक मुसीबत होती, असद, तो मैं इसे परदेस में भी सह लेता। पर यह बदनामी, हाय, मेरी दिल्ली में ही होनी थी।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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