गोश महजूर-ए-पयाम ओ चश्म-ए-महरूम-ए-जमाल
एक दिल तिस पर ये ना-उम्मीद-वारी हाए हाए
“My ears from tidings estranged, my eyes from beauty barred, alas!Alas, this solitary heart, burdened by such despair!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे कान संदेशों से वंचित हैं और आँखें सुंदरता से वंचित हैं। उस पर एक अकेला दिल और यह निराशा, हाए हाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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