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हर-बुन-ए-मू से दम-ए-ज़िक्र न टपके ख़ूँ नाब
हमज़ा का क़िस्सा हुआ इश्क़ का चर्चा न हुआ

If at love's mention, fresh blood doesn't drip from every pore, It's but a tale of Hamza, love's true discourse is no more.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर इश्क़ के ज़िक्र पर रोम-रोम से ताज़ा ख़ून न टपके, तो यह सिर्फ़ हमज़ा का क़िस्सा (एक वीरगाथा) हुआ, इश्क़ की असल बात नहीं हुई।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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