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सीने का दाग़ है वो नाला कि लब तक न गया
ख़ाक का रिज़्क़ है वो क़तरा कि दरिया न हुआ

That lament which reached not the lips, is a scar upon the breast;That drop which grew not to a river, is but nourishment for dust.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वह पुकार जो होठों तक न जा सकी, सीने का एक दाग़ है। वह बूंद जो दरिया न बन सकी, मिट्टी का भोजन है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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