“For your adornment, spring extends its welcome wide,The mirror's essence here, a thousand gardens hide.”
तेरी सजावट का वसंत स्वागत करती है। यहाँ हज़ारों बागों का प्रतिबिम्ब आईने का सार है।
तेरी आराइश का इस्तिक़बाल करती है बहार / जौहर-ए-आईना है याँ नक़्श-ए-एहज़ार-ए-चमन . Teri aaraish ka istiqbaal karti hai bahaar / Jauhar-e-aaina hai yaan naqsh-e-ehzaar-e-chaman. वसंत तुम्हारे सजने-संवरने का स्वागत करता है। यहाँ आईने की चमक बाग के दिखाई देने के नक़्शे जैसी है। शब्द आराइश का मतलब है सजना और इस्तिक़बाल का मतलब है स्वागत। जौहर आईने की उस खूबी या चमक को कहते हैं जो उसके अंदर होती है, और एहज़ार का मतलब है किसी चीज़ को हाज़िर या प्रकट करना। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ कह रहे हैं कि जब आप तैयार होते हैं तो पूरी कायनात आपको देखने के लिए रुक जाती है। [उम] वसंत का मौसम बाहर खड़ा होकर आपका इंतज़ार कर रहा है जैसे कोई मेहमान किसी खास शख्स का इंतज़ार करता है। [शॉर्ट पॉज़] जिस आईने में आप खुद को देख रहे हैं वह अब सिर्फ एक आईना नहीं रहा। उसमें जो चमक और लकीरें हैं, वे ऐसी लग रही हैं जैसे कोई खिलता हुआ बगीचा हो। आपकी सुंदरता आईने को भी महका देती है। [लॉन्ग पॉज़] ऐसा लगता है जैसे आईना खुद एक बाग बन गया हो सिर्फ आपका चेहरा देख कर। ग़ालिब हमें यह बता रहे हैं कि असली खूबसूरती वह नहीं जो सिर्फ दिखाई दे, बल्कि वह है जो अपने आसपास के माहौल को भी खुशनुमा बना दे। यह वैसा ही है जैसे किसी बेजान तस्वीर में अचानक जान आ जाए या किसी वीराने में पहली बारिश के बाद अचानक फूल खिल उठें। असली खूबसूरती वह है जो एक सादे से आईने को भी सपनों का बगीचा बना दे।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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