“From the beloved's vibrant charm, such utter rout was met, The flower's proud cap now on the garden wall's niche is set.”
बस इसलिए कि उसने प्रिय की रंगीन अदा से हार खाई, फूल का गर्व भरा ताज चमन की दीवार के ताक पर रखा है।
बस कि पाई यार की रंगीं-अदाई से शिकस्त, है कुलाह-ए-नाज़-ए-गुल बर ताक़-ए-दीवार-ए-चमन। क्योंकि मैं अपने प्रिय की रंगीन अदाओं से हार गया हूँ, इसलिए फूल की गर्व वाली टोपी अब बगीचे की दीवार के आले पर रखी हुई है। यहाँ 'रंगीं-अदाई' का अर्थ है सुंदर और आकर्षक अंदाज़, 'कुलाह-ए-नाज़' का मतलब है गर्व की टोपी, और 'ताक़' दीवार में बनी उस छोटी जगह या शेल्फ को कहते हैं जहाँ सामान रखा जाता है। मेरे दोस्त, ज़रा सोचिए कि आपके सामने कोई इतना खूबसूरत आ जाए कि आपको अपनी हर चीज़ मामूली लगने लगे। ग़ालिब कह रहे हैं कि उनके महबूब की अदाएँ इतनी बेमिसाल हैं कि बाग़ का सबसे घमंडी फूल, यानी गुलाब, भी उनके सामने हार मान चुका है। ऐसा लगता है जैसे गुलाब ने अपनी सुंदरता का ताज उतारकर दीवार के एक कोने में रख दिया हो क्योंकि उसे समझ आ गया है कि वह महबूब की चमक का मुकाबला नहीं कर सकता। हम अक्सर अपनी किसी चीज़ पर बहुत नाज़ करते हैं, लेकिन जब हम किसी और भी बेहतर चीज़ को देखते हैं, तो हमारा वह नाज़ ठंडा पड़ जाता है। ग़ालिब यहाँ उसी अहसास की बात कर रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे सूरज निकलने पर एक जलता हुआ दीया अपनी चमक खो देता है और उसे बुझाकर एक तरफ रख दिया जाता है। असली खूबसूरती वह है जिसके सामने दुनिया की हर शान फीकी पड़ जाए।
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