शोर-ए-तिम्साल है किस रश्क-ए-चमन का या रब
आइना बैज़ा-ए-बुलबुल नज़र आता है मुझे
“O Lord, to what envy-of-gardens belongs this clamor of the image?The mirror appears to me as a nightingale's egg.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे ईश्वर, यह छवियों का शोर किस ऐसे चमन का है जिस पर दूसरे रश्क करते हैं? मुझे आईना बुलबुल के अंडे जैसा नज़र आता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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