ख़ुदा के वास्ते दाद उस जुनून-ए-शौक़ की देना कि उस के दर पे पहुँचते हैं नामा-बर से हम आगे

“For God's sake, grant praise to this frenzy of my desire: / That at her threshold, I arrive ahead of my own messenger.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

भगवान के लिए मेरे इस इश्क़ के जुनून की प्रशंसा करना, कि हम महबूब की चौखट पर अपने ही संदेशवाहक से पहले पहुँच जाते हैं।

विस्तार

ज़रा इस दीवानगी और बेताबी की गहराई देखिए! आशिक़ ने अपने महबूब को ख़त देकर संदेशवाहक तो रवाना किया, मगर दिल की तड़प इतनी बेकाबू थी कि वह ख़ुद उस हरकारे से पहले महबूब के दर पर पहुँच गया। शायर ख़ुदा का वास्ता देकर अपने इस 'जुनून-ए-शौक़' यानी बेपनाह इश्क़ की तारीफ़ माँग रहा है। यह शेर मोहब्बत की उस मासूम और पुरजोश बेचैनी को बयां करता है जहाँ सब्र की हर हद टूट जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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