है इंतिज़ार से शरर आबाद रुस्तख़ेज़
मिज़्गान-ए-कोह-कन रग-ए-ख़ारा कहें जिसे
“Doomsday itself is vibrant with sparks of long wait, The mountain-digger's lashes, we call veins of hard stone.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
क़यामत का दिन इंतज़ार की चिंगारियों से आबाद है। जिसे हम कठोर पत्थर की नसें कहते हैं, वे दरअसल पहाड़ खोदने वाले की पलकें हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
