या रब हमें तो ख़्वाब में भी मत दिखाइयो
ये महशर-ए-ख़याल कि दुनिया कहें जिसे
“O Lord, do not show us, even in dreams, This tumult of thoughts that they call 'the world'.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे प्रभु, हमें तो सपने में भी वह विचारों का कोलाहल मत दिखाइए जिसे लोग दुनिया कहते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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