किस फ़ुर्सत-ए-विसाल पे है गुल को अंदलीब
ज़ख़्म-ए-फ़िराक़ ख़ंदा-ए-बे-जा कहें जिसे
“What moment of union can the rose afford the nightingale?The wound of parting is what we call an ill-placed, mocking laugh.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
गुलाब के पास बुलबुल के लिए मिलन का कौन सा अवसर है? जुदाई के घाव को ही हम एक अनुचित या व्यर्थ हंसी कहते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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