हो गए हैं जमा अजज़ा-ए-निगाह-ए-आफ़ताब
ज़र्रे उस के घर की दीवारों के रौज़न में नहीं
“The sun's gaze, its very components, are now amassed and pure;No dust motes in his home's wall-openings endure.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सूरज की निगाह के कण (सूरज की किरणों में धूल के ज़र्दे) जमा हो गए हैं। फिर भी, उनके घर की दीवारों के रौज़नों में एक भी ज़र्दा नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
