ज़ोफ़ से ऐ गिर्या कुछ बाक़ी मिरे तन में नहीं
रंग हो कर उड़ गया जो ख़ूँ कि दामन में नहीं
“From weakness, O tears, naught in my body remains,The blood that reached no skirt, as mere color, it flew.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ आँसुओ, कमज़ोरी के कारण मेरे शरीर में कुछ भी शेष नहीं बचा है। वह ख़ून जो दामन में नहीं था (जो बहकर दामन तक न पहुँचा), रंग (पीलापन) बनकर उड़ गया है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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