हम से अबस है गुमान-ए-रंजिश-ए-ख़ातिर ख़ाक में उश्शाक़ की ग़ुबार नहीं है

“In vain do you suspect a grievance in my heart; in the dust of lovers, not a speck of rancor remains.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हमसे दिल में किसी तरह की रंजिश या मैल का गुमान करना बेकार है, क्योंकि आशिक़ों की मिट्टी में कोई मैल या ग़ुबार नहीं होता।

विस्तार

शायर अपने महबूब से बड़ी नज़ाकत से कह रहा है कि हमारे दिल में कोई रंजिश या शिकवा है, ऐसा सोचना बिल्कुल बेमानी है। इश्क़ में आशिक़ मिटकर चाहे ख़ाक ही क्यों न हो जाए, उस ख़ाक में भी किसी तरह का मैल या नाराज़गी नहीं बचती। यहाँ 'ख़ाक' और 'ग़ुबार' (धूल और दिल का मैल) का बहुत ख़ूबसूरत लफ़्ज़ी खेल है, जो यह बतलाता है कि सच्ची मोहब्बत हर तरह की कड़वाहट से पाक होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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