झपक रही हैं ज़मान-ओ-मकाँ की भी आँखें मगर है काफ्ला आमादा-ए-सफर फिर भी

“The eyes of time and place are blinking, But the caravan of the journey is still arriving.”

— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ

समय और स्थान की आँखें झपक रही हैं, मगर फिर भी यात्रा का कारवां आ रहा है।

विस्तार

यह शेर एक गहरी तसल्ली देता है। शायर कहते हैं कि ज़माना, ये वक़्त और जगह... सब कुछ थका हुआ है, जैसे उनकी आँखें झपक रही हों। लेकिन, इस थकान के बावजूद, एक सफर का काफिला तैयार है। यह बताता है कि ज़िंदगी का सफ़र रुकना नहीं चाहिए, भले ही हालात कितने भी भारी क्यों न हों। यह हौसले की बात है!

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