એક ચકોર ચાર દીશાએ આથડ્યો રે. જોયાં જોયાં મોટાં શેહેર શોભિત રે, બીજે ક્યાંઈ...

“A single chakor, in four directions did roam,It saw many grand cities, adorned and fair, but nowhere else...”

— दलपतराम
अर्थ

एक चकोर पक्षी चारों दिशाओं में भटकता रहा। उसने कई भव्य और सुंदर शहर देखे, लेकिन कहीं और नहीं।

विस्तार

यह सुंदर दोहा एक चकोर पक्षी की कहानी कहता है, जो अपनी चंद्रमा के प्रति लालसा के लिए जाना जाता है। वह चारों दिशाओं में, दूर-दूर तक भटकता रहा। उसने कई भव्य और सुंदर शहर देखे, उनकी शोभा निहारी। लेकिन 'बीजे क्यॉई...' यह दर्शाता है कि उसे वह नहीं मिला जिसकी उसे वास्तव में तलाश थी। यह हमें सिखाता है कि बाहरी सुंदरता या भौतिक भव्यता अक्सर वह आंतरिक शांति या तृप्ति नहीं दे पाती जिसकी हम तलाश करते हैं। सच्ची संतुष्टि अक्सर बाहरी दुनिया से परे होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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