“Thirty ghadi once counted as a day; this day now seems like a year, I say. What shall I do, for I see it nowhere, my saffron-robed beloved, it is fair.”
पहले तीस घड़ी का दिन होता था, पर अब यह दिन एक साल जितना लंबा प्रतीत होता है। मैं क्या करूँ कि अपने केसरिया प्रेमी को कहीं देख नहीं पाता, जो बहुत सुंदर है।
यह दोहा समय के प्रति हमारी भावनाओं के बदलने का सुंदर वर्णन करता है। इसमें कहा गया है कि पहले एक दिन केवल तीस 'घड़ी' का माना जाता था, जिससे वह छोटा लगता था। लेकिन अब, वही दिन एक पूरे साल जितना लंबा महसूस होता है। यह एक गहरी लालसा, प्रतीक्षा, या शायद किसी दुख की भावना को दर्शाता है, जहाँ हर पल बहुत लंबा खींच जाता है। कवि फिर पूछता है, "मैं क्या करूँ? मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा।" और एक केसरिया रंग के प्रिय या ईश्वर को संबोधित करते हुए कहता है, "यह सुंदर है।" यह अंतिम पंक्ति समर्पण, स्वीकृति, या शायद लंबी प्रतीक्षा में भी एक अजीब सी सुंदरता खोजने का सुझाव देती है, जो भक्ति या प्रेम में निहित है।
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