વળી તેથી રહી બહુ વેગળી, અધર ઉડી આકાશ; નટડી નાચે છે. નિજ નજર ઠરાવી થાંભલે, ચકર ફરી ચોપાસ; નટડી નાચે છે.

“Remaining far apart, suspended in the sky; the dancer dances.Her gaze fixed on the pillar, she spins on every side; the dancer dances.”

— दलपतराम
अर्थ

नटनी बहुत दूर होकर, आकाश में अधर में उड़ती हुई नाचती है। अपनी नज़र खंभे पर टिकाकर, वह चारों ओर घूमकर नाचती है।

विस्तार

यह दोहा एक नटनी के मनमोहक नृत्य का वर्णन करता है, जो हवा में बहुत ऊंचाई पर कलाबाजी कर रही है, मानो वह धरती से बहुत दूर हो। वह तैरती है और चक्कर लगाती है, बड़ी फुर्ती और खूबसूरती से अपना प्रदर्शन करती है। लेकिन सबसे खास बात है उसका एकाग्र ध्यान। चाहे वह कितनी भी तेजी से हर दिशा में घूम रही हो, उसकी आँखें एक ही बिंदु पर टिकी रहती हैं – एक खंभे पर। यह गहरी एकाग्रता और आंतरिक संकल्प का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हमारी परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण या परिवर्तनशील क्यों न हों, या हम कितना भी भटकने जैसा महसूस करें, अपने लक्ष्य, अपने आधार या अपनी आंतरिक शक्ति पर अपनी नज़र स्थिर रखने से हम संतुलन बनाए रख सकते हैं और अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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