अदा से तेरी मगर खिंच रहीं हैं तलवारें — दाग़ देहलवी

अदा से तेरी मगर खिंच रहीं हैं तलवारें निगह निगह से छुरी पर छुरी निकलती है

“Yet at your graceful airs, swords are unsheathed; and from each glance, dagger upon dagger is drawn.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तुम्हारी दिलकश अदाओं के कारण तलवारें खिंच रही हैं और तुम्हारी हर एक नज़र से लगातार छुरियाँ चल रही हैं।

विस्तार

यहाँ शायर महबूब की दिलकश अदाओं और खूबसूरती के असर को बड़े ही अनोखे अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। महबूब की हर नाज़ुक हरकत किसी खिंची हुई तलवार जैसी लगती है और उनकी हर एक निगाह दिल पर छुरियाँ चला देती है। यह शेर बड़ी सादगी से दिखाता है कि हुस्न की मासूमियत भी आशिक़ के दिल के लिए कितनी जानलेवा और असरदार होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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