दस्त-ए-मूसा में फ़ैज़ बख़्शिश है — दाग़ देहलवी

दस्त-ए-मूसा में फ़ैज़ बख़्शिश है नूर-ओ-लौह-ओ-असा दिया तू ने

“In Moses' hand shines the bounty of Your grace; the radiant light, the sacred Tablet, and the staff You did bestow.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

हज़रत मूसा के हाथ में तेरी ही बख़्शिश की बरकत है, क्योंकि तूने ही उन्हें नूर, पवित्र तख़्ती और असा (लाठी) अता की है।

विस्तार

इस शे'र में शायर हज़रत मूसा को मिली ईश्वरीय नेमतों का ज़िक्र करते हुए ख़ुदा की असीम रहमत को याद कर रहा है। हज़रत मूसा के हाथों में जो रोशन नूर, आसमानी तख़्तियां (लौह) और चमत्कारी लाठी (असा) नज़र आई, वह सब रब की ही बख़्शिश और फ़ैज़ का करिश्मा था। साफ़ लफ़्ज़ों में यह शे'र हमें याद दिलाता है कि इंसान के पास जो भी ख़ासियत या सलाहियत है, वह दरअसल ख़ुदा की ही अता की हुई नेमत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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