शब-ए-तीरा में शम्अ' रौशन को — दाग़ देहलवी

शब-ए-तीरा में शम्अ' रौशन को नूर ख़ुर्शीद का दिया तू ने

“To the glowing candle in the pitch-dark night, You bestowed the radiant splendor of the sun.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तूने घनी अंधेरी रात में जलती हुई शमा को सूरज जैसी रोशनी बख्श दी।

विस्तार

इस शेर में शायर ईश्वर या अपने महबूब की उस असीम रहमत की बात कर रहा है, जो मामूली से वजूद को भी बुलंदी बख्श देती है। घोर अंधेरी रात में जलती हुई एक छोटी सी मोमबत्ती को तूने सूरज जैसी रौशनी और शान अता कर दी। इसका गहरा पैग़ाम यह है कि जब करम की नज़र हो, तो मायूसी के घने अंधकार में भी एक नन्हीं सी उम्मीद आफताब बनकर चमक उठती है।

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