अब ऐ निगह-ए-शौक़ न रह जाए तमन्ना — दाग़ देहलवी

अब ऐ निगह-ए-शौक़ न रह जाए तमन्ना इस वक़्त उधर से वो इधर देख रहे हैं

“O gaze of ardent longing, let no desire remain unspent; at this very moment, from over there, their eyes are turned my way.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

ऐ चाहत भरी नज़र, अब कोई इच्छा अधूरी न रह जाए, क्योंकि ठीक इसी समय महबूब वहाँ से इस तरफ़ देख रहे हैं।

विस्तार

यह शेर उस जादुई पल की दास्तान है जब महबूब की नज़रें अचानक आपकी तरफ़ मुड़ जाती हैं। शायर अपनी 'निगह-ए-शौक़' यानी चाहत से भरी निगाहों से कहता है कि अब कोई भी अरमान दिल में अधूरा न रहने पाए, क्योंकि वो दुर्लभ लम्हा आ गया है जिसका मुद्दतों से इंतज़ार था। इसमें प्यार की बेताबी, एक हसीन हड़बड़ाहट और उस एक अनमोल नज़र की पूरी गहराई सिमटी हुई है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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