यूँ है मंज़ूर ख़ाना-वीरानी — दाग़ देहलवी
“So pleasing to them is the ruin of my home, that they purchase my house just to lay it waste.”
अर्थ
उन्हें मेरा घर तबाह करना इस कदर मंज़ूर है कि वे उसे बर्बाद करने के लिए ही मेरा मकान ख़रीद रहे हैं।
विस्तार
इस शेर में एक बड़ा ही दर्दनाक और तंज़िया (व्यंग्यात्मक) पहलू छुपा है। शायर कहता है कि लोगों को या महबूब को मेरी बर्बादी इस कदर पसंद है कि वे बाकायदा कीमत चुकाकर मेरा घर खरीदते हैं, सिर्फ इसलिए ताकि उसे खुद वीरान कर सकें। यह इस बात की इंतहा है कि किसी को आपकी तबाही देखने का कितना गहरा जुनून हो सकता है कि वह उसे एक सौदे की तरह अंजाम देता है।
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