कर गुज़रते हैं हो बुरी कि भली — दाग़ देहलवी
कर गुज़रते हैं हो बुरी कि भली
दिल में जो कुछ वो ठान लेते हैं
“Be it for the worse or be it for the good, / They carry out whatever their heart resolves.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
लोग अपने दिल में जो कुछ भी ठान लेते हैं, उसे कर ही डालते हैं, चाहे उसका नतीजा अच्छा हो या बुरा।
विस्तार
यह शेर दिल की बेपरवाह ज़िद और इंसान के अड़ियल जज़्बे की बहुत ख़ूबसूरत तस्वीर खींचता है। जब दिल किसी बात की ठान ले, तो नफ़ा-नुकसान या सही-ग़लत की सारी समझदारी धरी की धरी रह जाती है। चाहे अंजाम तबाही हो या राहत, आशिक़ या महबूब बस उसी धुन में आगे बढ़ जाता है जो उसके दिल में समा गई हो।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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