दर्द दिल का न कहिए या कहिए — दाग़ देहलवी

दर्द दिल का न कहिए या कहिए जब वो पूछे मिज़ाज क्या कहिए

“Should I speak of the heart's pain or keep it concealed? / When she asks how I fare, what can be revealed?”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

दिल का दर्द बयां करें या न कहें; जब वह हाल-चाल पूछें, तो समझ नहीं आता कि क्या जवाब दिया जाए।

विस्तार

यह शेर उस नाज़ुक और कशमकश भरे लम्हे की तस्वीर खींचता है, जब दर्द देने वाला महबूब ही मुस्कुराकर पूछ ले—'कहिए, मिज़ाज कैसा है?' दिल इस उलझन में पड़ जाता है कि अगर सारा दर्द बयां कर दें तो कहीं यह शिकायत न लगे, और अगर छुपा लें तो अपने ही जज़्बातों से बेईमानी होगी। यह ख़ामोश बेबसी और इश्क़ की उस लाचारी को दर्शाता है जहाँ एक सीधा-सा औपचारिक सवाल भी इंसान को निरुत्तर कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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