होश जाते रहे रक़ीबों के — दाग़ देहलवी
होश जाते रहे रक़ीबों के
'दाग़' को और बा-वफ़ा कहिए
“The rivals have quite lost their senses / Go on, praise Dagh as faithful even more.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
रक़ीबों (प्रतिद्वंद्वियों) के होश उड़ते जा रहे हैं, आप 'दाग़' को और भी वफ़ादार कहते रहिए।
विस्तार
दाग़ देहलवी का यह शेर उनकी ख़ास शोख़ी और अंदाज़-ए-बयां का खूबसूरत नमूना है। शायर महबूब से बड़ी शरारत से कहता है कि जब आपने मुझे वफ़ादार कहा, तो मेरे दुश्मनों और रक़ीबों के होश उड़ गए; अब ज़रा उन पर और सितम ढाइए और मेरी तारीफ़ करते रहिए। इस शेर में मुहब्बत के साथ-साथ रक़ीबों को चिढ़ाने का एक बेहद प्यारा और चुटीला अंदाज़ झलकता है।
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