मुझ को कहिए बुरा न ग़ैर के साथ — दाग़ देहलवी
मुझ को कहिए बुरा न ग़ैर के साथ
जो हो कहना जुदा जुदा कहिए
“Do not reproach me alongside my rival; whatever you have to say, say it to each apart.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
मुझे ग़ैर के साथ मिलाकर बुरा मत कहिए; जो कुछ भी कहना हो, हम दोनों से अलग-अलग कहिए।
विस्तार
इस शेर में आशिक़ की अनोखी अना और मोहब्बत का एक नाज़ुक पहलू झलकता है। वह महबूब से कहता है कि आप मुझे बुरा-भला कहें तो भी मंज़ूर है, लेकिन मुझे रक़ीब (ग़ैर) के साथ एक ही तराज़ू में मत तोलिए। आशिक़ के लिए महबूब की डांट में भी एक तरह का अपनापन होता है, मगर गै़रों के साथ की गई बराबरी उसकी मोहब्बत की तौहीन बन जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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