भरे हैं तुझ में वो लाखों हुनर ऐ मजमा-ए-ख़ूबी — दाग़ देहलवी

भरे हैं तुझ में वो लाखों हुनर ऐ मजमा-ए-ख़ूबी मुलाक़ाती तिरा गोया भरी महफ़िल से मिलता है

“Such myriad arts reside in you, O epitome of grace, that meeting you alone feels like entering a crowded gathering face to face.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

हे खूबियों के केंद्र, तुझमें अनगिनत हुनर भरे हैं, इसलिए जो भी तुझसे मिलता है उसे ऐसा लगता है मानो वह किसी भरी महफ़िल से मिल रहा हो।

विस्तार

शायर यहाँ अपने महबूब की तारीफ़ करते हुए कहता है कि तुममें हुस्न, हुनर और खूबियों का ऐसा खज़ाना भरा है कि तुम अकेले ही एक पूरी महफ़िल के बराबर हो। जब कोई तुमसे तन्हाई में भी मिलता है, तो उसे लगता है जैसे वह अनगिनत फनकारों और रौनक से भरी किसी अंजुमन में आ गया हो। यह शेर एक ऐसे मुकम्मल और दिलकश इंसान की तस्वीर खींचता है जिसकी सोहबत कभी खालीपन या अकेलेपन का अहसास नहीं होने देती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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