मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं — दाग़ देहलवी
“Only they truly know the sweet delights of love, who reckon death itself to be life.”
अर्थ
इश्क़ का असली आनंद केवल वही लोग जानते हैं, जो मौत को ही ज़िंदगी समझते हैं।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस गहरे विरोधाभास को बयां करता है, जहाँ महबूब की ख़ातिर खुद को मिटा देना ही असली ज़िंदगी बन जाता है। यहाँ 'मौत' से मुराद सिर्फ़ जिस्मानी अंत नहीं, बल्कि अपने अहंकार और 'अना' को पूरी तरह ख़त्म कर देना है। शायर कहते हैं कि इश्क़ की सच्ची मिठास वही जान पाते हैं, जो इस मुकम्मल समर्पण और मिट जाने को दर्द नहीं बल्कि रूहानी ज़िंदगी समझते हैं।
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