की मिरी क़द्र मिस्ल-ए-शाह-ए-दकन किसी नव्वाब ने न राजा ने

“Neither did any Nawab nor any Raja ever prize my worth, as did the King of the Deccan.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

दक्कन के बादशाह की तरह मेरी क़द्र न तो किसी नवाब ने की और न ही किसी राजा ने।

विस्तार

इस शेर में शायर दकन के बादशाह (निज़ाम) की क़द्रदानी और दरियादिली का एहसान मान रहे हैं। उनका कहना है कि मुल्क में बड़े-बड़े नवाब और राजा हुए, मगर उनके हुनर और शायरी की जो सच्ची पहचान और इज़्ज़त शाह-ए-दकन ने की, वैसी किसी और ने नहीं की। यह शेर एक सच्चे पारखी की अहमियत बताता है, जो किसी कलाकार के हुनर को दुनिया के सबसे अनमोल खज़ाने की तरह सहेजता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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