“All have exhausted every remedy and art they knew; / When life's last breath departs, what can a companion do?”
सब लोग अपनी-अपनी तरकीबें और उपाय आज़मा चुके हैं; जब जान ही निकल रही हो तो भला कोई साथी क्या कर सकता है?
इस शेर में शायर ने इंसानी बेबसी और तकदीर के आगे लाचारी का बहुत दर्दनाक मंज़र खींचा है। यहाँ 'दम' (साँस या ज़िंदगी) और 'हमदम' (साँस का साथी यानी सच्चा दोस्त) के बीच का लफ़्ज़ी रिश्ता दिल छू लेता है। जब दर्द की इंतहा हो जाए और रूह ही रुख़सत होने लगे, तो दुनिया के सारे नुस्ख़े और दोस्तों की बेपनाह मोहब्बत भी बेअसर साबित होती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
