“If Dagh has gone astray, then let him be; among a hundred slaves, one often turns out bad.”
अगर 'दाग़' का चाल-चलन खराब है तो रहने दो, आख़िर सौ में से एक गुलाम तो बिगड़ा हुआ निकल ही आता है।
इस शे'र में दाग़ देहलवी का बेबाक और शोख़ अंदाज़ देखते ही बनता है। जब ज़माना उनकी बदचलनी पर उँगलियाँ उठाता है, तो वे बड़ी मासूमियत और बेपरवाही से कहते हैं कि अगर महबूब के सैकड़ों ग़ुलामों में से एक थोड़ा बिगड़ैल निकल भी गया, तो कौन सी बड़ी बात है! दाग़ यहाँ अपनी ख़ामियों को छिपाने के बजाय उन्हें महबूब की वफ़ादारी का चोला पहनाकर एक ख़ूबसूरत अदा बना देते हैं।
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