क्या मिला हम को ज़िंदगी के सिवा
वो भी दुश्वार ना-तमाम ख़राब
“What did we ever gain, except for life? And that too: arduous, incomplete, undone.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
हमें ज़िंदगी के सिवा और क्या मिला, और वह ज़िंदगी भी कठिन, अधूरी और बर्बाद ही रही।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के सफ़र की एक गहरी और दर्दभरी दास्तान बयां करता है। शायर कहता है कि इस जहां से हमें हासिल के तौर पर सिर्फ़ ज़िंदगी ही तो मिली, पर अफ़सोस कि वह भी आसान न थी—मुश्किलों से भरी, अधूरी और बिखरी हुई। यह एक ऐसे इंसान की थकी हुई आवाज़ है, जो जीने के इस तोहफ़े की कड़वी सच्चाई को नम आँखों से कबूल कर रहा है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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