“Far better was the gentle breeze than this rain-laden cloud; my dust has turned to wretched mire, utterly ruined and undone.”
इस बरसते बादल से तो सुबह की हल्की हवा ही बेहतर थी, क्योंकि इस बारिश ने मेरी मिट्टी को पूरी तरह ख़राब कर दिया है।
आम तौर पर बारिश को रहमत और राहत माना जाता है, लेकिन उस आशिक़ के लिए जो मिटकर ख़ाक हो चुका है, यह भीगा बादल आफ़त बन गया। सुबह की मंद हवा (सबा) फिर भी बेहतर थी, क्योंकि वह उसकी बची-खुची राख को आज़ादी से हवा में उड़ने देती थी। इस भारी बारिश ने तो उस मिट्टी को कीचड़ बनाकर पूरी तरह रुसवा कर दिया—यानी कभी-कभी ज़रूरत से ज़्यादा हमदर्दी या आँसू भी इंसान के दर्द को राहत देने के बजाय उसकी बेबसी को और तमाशा बना देते हैं।
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