बज़्म से उठने की ग़ैरत बैठने से दिल को रश्क देख कर ग़ैरों का मजमा क्या परेशानी हुई

“Leaving the assembly wounds my pride, yet staying stirs bitter envy; seeing that crowd of rivals around you, what deep torment overtook me!”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

महफ़िल से उठकर जाने में स्वाभिमान आहत होता है और वहाँ बैठे रहने से दिल में जलन होती है; दूसरों की उस भीड़ को देखकर मुझे कितनी भारी परेशानी और दुविधा हुई।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ की उस लाचारी को ख़ूबसूरती से बयां किया गया है, जहाँ उसकी ख़ुद्दारी और जलन आमने-सामने खड़ी हैं। महफ़िल छोड़कर जाना उसे अपनी हार या बेइज़्ज़ती जैसा लगता है, लेकिन वहीं बैठे रहने पर महबूब के इर्द-गिर्द ग़ैरों का मजमा देखकर उसका दिल रश्क से जल उठता है। शायर ने दिल की उस बेबसी को पकड़ा है जहाँ रुकना भी एक अज़ाब है और उठकर जाना भी बर्दाश्त से बाहर।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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