क़सम दे कर उन्हें ये पूछ लो तुम रंग-ढंग उस के तुम्हारी बज़्म में कुछ दोस्त भी दुश्मन के बैठे हैं

“Bind them by an oath and ask of his true ways, for seated in your assembly are friends of the enemy too.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

उन्हें क़सम देकर उसके तौर-तरीक़ों के बारे में पूछ लो, क्योंकि तुम्हारी महफ़िल में दुश्मन के कुछ दोस्त भी बैठे हुए हैं।

विस्तार

यह शेर महफ़िल की ख़ामोश सियासत और धोखेबाज़ी की तरफ़ बड़ा गहरा इशारा करता है। शायर अपने महबूब या दोस्त को सावधान कर रहा है कि तुम्हारी बज़्म में सब अपने नहीं हैं, बल्कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो चुपचाप दुश्मन से ताल्लुक रखते हैं। अगर उनसे उस दुश्मन का सच उगलवाना है तो उन्हें क़सम दिलानी पड़ेगी, क्योंकि महफ़िलों में अक्सर अपनेपन का मुखौटा पहनकर ग़द्दारी बैठी होती है।

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