अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता

“How wondrous my state would be, were there union with the beloved; at times my life would be sacrificed, at times my heart surrendered.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अगर महबूब से मिलन होता तो मेरी हालत भी क्या अजब होती; कभी मैं उन पर अपनी जान क़ुर्बान करता तो कभी अपना दिल न्योछावर करता।

विस्तार

यह शेर महबूब से मिलन की उस ख़ूबसूरत कल्पना को बयां करता है, जहाँ ख़ुशी इतनी बेहिसाब होगी कि दिल संभाले नहीं संभलेगा। शायर कहता है कि अगर कभी विसाल का वह मुक़द्दस लम्हा नसीब हो जाता, तो दीवानगी का यह आलम होता कि कभी अपनी जान उन पर न्योछावर करते तो कभी दिल वार देते। यहाँ मुकम्मल समर्पण का ऐसा जज़्बा है, जहाँ अपने अस्तित्व को पूरी तरह मिटा देने में ही इश्क़ की असली जीत महसूस होती है।

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