Sukhan AI
Dhandh kaleje bal bal uthdi
Bin dheke deedar
Rabba hun ki kariye

The heart's ache, trembling, arises, Without seeing your glance, Oh God, what shall I do?

बुल्ले शाह
अर्थ

दहँध कलेजे बल बल उठती बिन देखे दीदार रब्बा हूँ कि करिये

विस्तार

यह नज़्म बिछड़ने के दर्द और मिलन की तीव्र चाहत को बयान करती है। बुलले शाह कहते हैं कि दिल में एक बेचैन सी हलचल है, जो किसी न किसी नूर की तलाश में है। वो रब से पूछते हैं कि जब यह दिल बिना दीदार के इतना व्याकुल है, तो अब उन्हें क्या करना चाहिए। यह आत्मा की ईश्वर से विरह में पुकार है।

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