ग़ज़ल
उठ गए गवांढों यार
اٹھ گئے گوانڈھوں یار
यह ग़ज़ल एक भावनात्मक पुकार है, जिसमें गायक अपने प्रिय या ईश्वर से मदद मांगते हुए जगाने और साथ चलने की विनती कर रहे हैं। यह जीवन की अस्थिरता और सच्चे प्रेम के महत्व को दर्शाता है।
गीत सुनें
1
اٹھ گئے گوانڈھوں یار
ربّا ہݨ کی کریئے
उठ गए गवांढों यार
रब्बा हुण की करीए
गवनों यार उठ गए, हे रब्बा! कुछ कीजिए।
2
اٹھ چلے ہݨ رہندے ناہیں
ہویا ساتھ تیار
ربّا ہݨ کی کریئے
उठ चले हुण रहंदे नाहीं
होइआ साथ तैयार
रब्बा हुण की करीए
मैं जा रहा हूँ, मैं यहाँ नहीं रहूँगा। मेरा साथी अब तैयार नहीं है। हे भगवान, मुझे क्या करना चाहिए?
3
ڈھانڈھ کلیجے بل بل اٹھدی
بن ویکھے دیدار
ربّا ہݨ کی کریئے
ढांड कलेजे बल बल उठदी
बिन देखे दीदार
रब्बा हुण की करीए
दहँध कलेजे बल बल उठती
बिन देखे दीदार
रब्बा हूँ कि करिये
4
بلھے شاہ پیارے باجھوں
رہے ارار نہ پار
ربّا ہݨ کی کریئے
बुल्ले शाह पिआरे बाझों
रहे उरार न पार
रब्बा हुण की करीए
बुल्ले शाह प्यारे बाजहों, रहे उरार ना पार। रब्बा हूँ कि करिये।
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