Sukhan AI
Parh parh nafal namaz guzarien
Achian bangaan changha mari
Manber tey chaRRh waaz pukarein
Keeta teeno ilm khawar

As you recite prayer after prayer, passing by, (The) changha, the bangaan, the mari, are ignored. When the call to prayer echoes from the minbar, (You neglect) the three kinds of knowledge (ilm).

बुल्ले शाह
अर्थ

हर नमाज़ के बाद नमाज़ गुज़रने से, अचीयान, बंगाण और मरी को भुला दिया जाता है। जब मिम्बर से अज़ान की आवाज़ आती है, तो तीनों तरह के इल्म को भुला दिया जाता है।

विस्तार

Bulleh Shah साहब इस शेर में पाखंड और दिखावे पर गहरी बात कह रहे हैं। शायर बता रहे हैं कि केवल नमाज़ पढ़ना, मंच पर भाषण देना, या तीनों विद्याओं का ज्ञान होने का दावा करना काफी नहीं है। सच्चा ज्ञान और इबादत दिल से आती है। बाहरी रस्मों का पालन करना तब तक व्यर्थ है, जब तक इंसान के दिल में सच्चाई और नीयत न हो। यही बात शायर हमें समझाना चाहते हैं।

ऑडियो

पाठ
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