नी एह जोगी नईं कोई रूप है रब दा

“Oh, where is the ascetic's path? What form does the Lord possess?”

— बुल्ले शाह
अर्थ

अरे, योगी का मार्ग कहाँ है? प्रभु का कौन सा रूप है।

विस्तार

इस खूबसूरत शेर में, Bulleh Shah हमें उस परम सत्य की ओर इशारा कर रहे हैं जो किसी एक रूप में बंधा नहीं है। शायर जी कहते हैं कि आप योगी से बात कर रहे हैं, और उन्हें समझा रहे हैं कि ईश्वर का कोई निश्चित रूप नहीं है। यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि भक्ति का मार्ग केवल बाहरी आडंबरों से होकर नहीं गुजरता। सच्चा प्रेम और अनुभव मन के भीतर होता है, जो हर रूप और सीमा से परे है। यह एक गहरा आध्यात्मिक संदेश है।

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