Sukhan AI
Phok musaleh, bhun sat lota
Na parh tasbeh, aasa, sota
Ashiq kehndey dey dey hoka
“Tark hlaalon, kha murdar”

Oh, the recitation of prayers, the counting of beads, Do not read the beads, oh seeker, while you sleep. The lover says, 'Let the argument happen, let the flesh be consumed,'

बुल्ले शाह
अर्थ

फ़ोक मुसालेह, भुं सत लोटा। न परह तस्बीह, आसा, सोता। आशिक कहंदे दे दे होके, 'तर्क हलालन, खा मुर्दार।'

विस्तार

Bulleh Shah साहब ने यहाँ बाहरी दिखावे के धर्म को चुनौती दी है। शायर कहते हैं कि केवल तस्बीह जपना या दुआएँ पढ़ना काफी नहीं है। असली भक्ति तो दिल की सच्चाई में है। वह हमें पाखंड छोड़ने और जीवन के गहरे सत्य को स्वीकार करने का संदेश देते हैं। यह कविता हमें दिखावे से हटकर, आत्मिक ईमानदारी की ओर देखने का आह्वान करती है।

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