ग़ज़ल
तेरे इश्क़ नचाया
تیرے عشق نچایا
यह ग़ज़ल बताती है कि महबूब के इश्क़ ने वक्ता को किस तरह नचाया है। वक्ता ने अपने अंदर ज़हर का डेरा किया और उसे पीना भी स्वीकार किया। यह इश्क़ इतना गहरा है कि वक्ता अपनी पहचान और सब कुछ खो चुकी है।
गीत सुनें
1
تیرے عشق نے ڈیرا میرے اندر کیتا
بھر کے زہر پیالہ میں تاں آپے پیتا
جھبدے وہڑی طبیبا نہیں تے میں مر گئیاں
تیرے عشق نچایا کر کے تھیا تھیا
तेरे इश्क़ ने डेरा मेरे अंदर कीता
भर के ज़हर प्याला मैं तां आपे पीता
झबदे वहड़ी तबीबा नहीं ते मैं मर गईयां
तेरे इश्क़ नचाया कर के थैया थैया
तेरे इश्क़ ने डेरा मेरे अंदर किया, / भर के ज़हर प्याला मैं तान आपे पीता, / जबदे वहुदी तबीबा नहीं ते मैं मर गईया, / तेरे इश्क़ नचाईयाँ कर के थैया थैया।
2
چھپ گیا وے سورج باہر رہ گئی لالی
छुप गया वे सूरज बाहर रह गई लाली
सूरज ने अपनी बसंत जैसी लाली छुपा ली है। मैं सच में हो गई, मैंने तो अपनी देहें मोड़ ली हैं। पीड़ा मैं भूल गई, तुम्हारे साथ नहीं गई। तुम्हारे इश्क़ ने नचाया और इस तरह मैं हो गई।
3
ایس عشق دے کولوں مینوں ہٹا نہ مائے
لاہو جاندے بیڑے کیہڑا موڑ لیایا
میری عقل جوں بھلی نال مہانیاں دے گئیاں
تیرے عشق نچایا کر کے تھیا تھیا
ऐस इश्क़ दे कोलों मैनूं हटा ना माए
लाहू जांदे बेड़े केहड़ा मोड़ ले आया
मेरी अक़ल जूं भुल्ली नाल मुहाणियां दे गईयां
तेरे इश्क़ नचाया कर के थैया थैया
इस इश्क़ के क़हर से मुझे दूर मत करना माँ। घाव बह रहे हैं, और मेरा दिल बेचैन है। मेरी अक़्ल मेरे अपने हाथों से भुला दी गई है, और तुम्हारे इश्क़ ने मुझे नचाकर खो दिया है।
4
ایس عشق دی جھنگی وچ مور بولیندا
سانوں قبلہ تے کعبہ سوہنا یار دسیندا
سانوں گھائل کر کے پھر خبر نہ لئیاں
تیرے عشق نچایا کر کے تھیا تھیا
ऐस इश्क़ दी झंगी विच मोर बोलेंदा
सानूं क़िबला ते काबा सोहणा यार दिसेंदा
सानूं घायल कर के फेर ख़बर ना लईयां
तेरे इश्क़ नचाया कर के थैया थैया
इस प्यार की झाड़ी में मुझे प्रिय काबा की तरह सुंदर दिखाई देता है। हमें घायल करके फिर खबर भी नहीं दी। तुमने प्यार से हमें नचाया और फिर हमें टूटा हुआ छोड़ दिया।
5
بلھا شاہ نہ آؤندا مینوں عنایت دے بوہے
جس نے مینوں پواۓ چولے ساوے تے سوہے
جاں میں ماری اے اڈی مل پیا اے وہائیا
تیرے عشق نچایا کر کے تھیا تھیا
बुल्हा शाह न औंदा मैनूं इनायत दे बूहे
जिसने मैनूं पवाए चोले सावे ते सूहे
जां मैं मारी ऐ अड्डी मिल पया है वहाईया
तेरे इश्क़ नचाया कर के थैया थैया
बुल्ला शाह, मैं कृपा के आलिंगन में आपको नहीं पा सकता। जिसने मुझे बिछोह और जीवन के किनारे पर ला खड़ा किया। मेरा जीवन बलिदान हो गया, और मुझे तुम मिल गए, मेरे प्रिय। तेरे इश्क़ ने नचाया और इसी से मैं अस्तित्व में आया।
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