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Gharyal diyo nikal ni
Aaj pe ghar ay nikal ni

The torch was lit, the journey began, Today, the home is lit, the journey began.

बुल्ले शाह
अर्थ

घरेयाल दीयो निकल नी आज पे घर आय निकल नी

विस्तार

यह अशआर बुल्ले शाह का जीवन के शाश्वत चक्र को दर्शाते हैं। शायर कहते हैं कि जिस तरह कोई यात्रा आज यहाँ से निकलनी है, उसी तरह जीवन के हर पड़ाव पर एक विदाई का भाव निहित है। यह हमें सिखाता है कि कोई भी ठहराव स्थायी नहीं होता। यह रचना हमें याद दिलाती है कि हमें हर पल को पूरी भावना से जीना चाहिए, क्योंकि हर आगमन एक प्रस्थान की तैयारी होता है।

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