“Here lies a bed of dust, a shroud around the neck; there, a mirror in the hand, robed in blooming petals.”
यहाँ मिट्टी का बिछौना है और गले में कफ़न है, जबकि वहाँ हाथ में आईना है और फूलों का लिबास पहना हुआ है।
यह शेर आशिक़ और माशूक़ के दो बिल्कुल अलग आलमों के दर्दनाक फ़र्क़ को दिखाता है। एक तरफ़ आशिक़ की बेबसी और फ़क़ीरी है—ज़मीन की धूल ही उसका बिस्तर है और गले में कफ़न, जो उसके मिट जाने का इशारा है। दूसरी तरफ़ महबूब की हसीन दुनिया है, जिसके हाथ में आईना है और बदन पर फूलों सा नाज़ुक लिबास। यह इश्क़ की उस लाचारी को बड़ी नफ़ासत से बयान करता है जहाँ एक तरफ़ फ़ना होने की तड़प है और दूसरी तरफ़ बेपरवाह हुस्न का जलवा।
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