“There, today, another design stirs within the slayer's heart; and here, another yearning aches within the victim's heart.”
वहाँ आज उस क़ातिल के दिल में कुछ और ही इरादा है, जबकि यहाँ इस तड़पते हुए घायल के दिल में कोई दूसरी ही ख़्वाहिश है।
इस शेर में आशिक़ और माशूक़ के दरमियान के नाज़ुक खिंचाव को बड़ी ख़ूबसूरती से बयां किया गया है। माशूक़ (क़ातिल) के दिल में आज शायद जुल्म का कोई नया ढंग या कोई अलग ही इरादा चल रहा है, जबकि कुर्बान होने जा रहे आशिक़ (बिस्मिल) की हसरत कुछ और ही सुकून पाने की है। यह मोहब्बत के उस ख़ास मुक़ाम की तस्वीर है जहाँ जान देने की घड़ी में भी दोनों के दिलों के अरमान एक-दूसरे से जुदा और पुर-असरार हैं।
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