ख़ूब होगा हाँ जो सीने से निकल जाएगा तू चैन मुझ को ऐ दिल-ए-पुर-इज़्तिराब आ जाएगा

“It would be well indeed if from my breast you depart; peace at last would come to me, O restless, troubled heart!”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ बेचैन दिल, बहुत अच्छा होगा अगर तू मेरे सीने से बाहर निकल जाए, क्योंकि तेरे जाने के बाद ही मुझे चैन और सुकून मिल सकेगा।

विस्तार

यहाँ शायर अपने ही बेचैन और तड़पते हुए दिल से एक थकी हुई गुफ़्तगू कर रहा है। वह कहता है कि ऐ बेचैन दिल, अगर तू मेरे सीने को छोड़ कर हमेशा के लिए चला जाए तो कितना अच्छा हो, कम से कम मुझे थोड़ा सुकून तो नसीब होगा। इस शेर में एक गहरा दर्द और तल्ख़ तंज़ है—दिल का सीने से निकल जाना मौत की निशानी है, लेकिन शायर के लिए दिल की यह मुसलसल बेकरारी मौत से भी ज़्यादा तकलीफ़देह बन चुकी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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