“Be not so restless, for if their wrath should fall, you will be caught in calamity, O my ruined heart.”
इतने बेचैन मत हो, क्योंकि अगर महबूब का गुस्सा टूट पड़ा, तो ऐ मेरे बर्बाद दिल, तू बड़ी आफ़त में फँस जाएगा।
इस शेर में शायर अपने ही बेचैन दिल को एक नासमझ दोस्त की तरह समझा रहा है कि वह ज़रा सब्र से काम ले। माशूक़ का ग़ुस्सा (इताब) कोई मामूली बात नहीं, बल्कि वह एक ऐसी आफ़त (ग़ज़ब) बनकर टूट सकता है जो आशिक़ की बची-खुची दुनिया भी उजाड़ दे। दिल को 'ख़ाना-ख़राब' यानी अपनी ही बर्बादी का सामान करने वाला कहकर पुकारना, इश्क़ की उस बेबसी को दिखाता है जहाँ बेक़रारी और डर दोनों एक साथ धड़कते हैं।
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