गर खिंचे सीने से नावक रूह तू क़ालिब से खींच ऐ अजल जब खिंच गया वो तीर फिर खींची तो क्या

“If the arrow is drawn from my breast, draw the soul from my frame, O Death; / Once that arrow has been pulled out, what use in drawing my breath?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ मौत, अगर मेरे सीने से तीर निकाला जाए तो उसी वक़्त मेरे शरीर से रूह भी खींच ले; क्योंकि जब वह तीर निकल ही गया, तो उसके बाद जान निकालने का क्या फ़ायदा।

विस्तार

यहाँ आशिक़ मौत यानी अजल से बड़ी बेबाकी और नफ़ासत भरे तंज़ के साथ मुख़ातब है। महबूब का तीर सीने में ऐसा धंसा है कि वही उसके जीने का सबब बना हुआ है—तीर खिंचेगा तो जान तो यूँ भी जाएगी। इसलिए वह अजल से कहता है कि अगर सीने से यह तीर निकले, तो तू भी साथ ही जान खींच लेना; क्योंकि तीर निकल जाने के बाद जब मैं वैसे ही नहीं बचूँगा, तो फिर तेरा जान निकालना किस काम का!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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