ऐ मुहव्विस जब कि ज़र तेरे नसीबों में नहीं तू ने मेहनत भी पय-ए-इक्सीर फिर खींची तो क्या

“O covetous soul, when gold is not written in your fate, what avails even if you toiled in pursuit of the elixir?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

ऐ लालची इंसान, जब दौलत तेरे नसीब में ही नहीं है, तो फिर अगर तूने पारस (कीमिया) हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत भी की तो उसका क्या फ़ायदा?

विस्तार

शायर यहाँ लालच और तक़दीर की कशमकश को बड़े प्यारे अंदाज़ में समझा रहे हैं। वे उस इंसान से मुख़ातब हैं जो मिट्टी को सोना बनाने वाले 'इक्सीर' की तलाश में दिन-रात खुद को थका रहा है। लेकिन शायर कहते हैं कि जब क़िस्मत में ही दौलत न हो, तो ऐसे चमत्कारी नुस्खों के पीछे भागने का क्या हासिल? यह शेर हमें याद दिलाता है कि हवस की अंधी दौड़ में भटकने से बेहतर है कि इंसान अपनी तक़दीर और सुकून की क़दर करे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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